Virchand Raghavji Gandhi (1864-1901)

This is official Blog of Virchand Gandhi Descendants, for more details contact Chandresh Dhiraj Gandhi (Great Grand Son of Virchand Gandhi)  – 917567468916

Virchand Ghandi at All Famous Quotes

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For all Latest photos on Virchand Raghavji Gandhi by Pankaz Chandmal Hingarh & Chandresh Dhiraj Gandhi please visit http://www.flickr.com/photos/herenow4u/sets/72157632530942412/with/8383070219/

Details on Virchand Gandhi available in 3 languages on this Blog:  English , Hindi , Gujarati

Virchand Raghavji Gandhi

"Virchand Gandhi world peace quote"

Virchand Raghavji Gandhi (1864-1901) a 19th Century Indian Legend known for his practice of universal brotherhood , died only at age of 37 and delivered 535 speeches in USA and Europe on various subjects in his short life span.

Virchand Gandhi’s Brief Background in English:

Virchand Gandhi was important delegate to world’s 3 historic events , 1893′s Parliament of world religions , 1893′s World’s Real Estate Congress  and as sole Indian delegate participated World’s 3rd historic esteemed event , in 1899′s International Congress of Commerce by Philadelphia Commercial Museum. As a reformer he initiated a society in chicago , named the Society for Education of Women in India (SEWI) under whose banner several Indian women went to the USA for education . As a humanitarian , he collected money and sent Rs 40,000 and a shipload of grains from the USA to India during the worst famine of 1896-97.  From  Old Diary Leaves by H.S. Olcott (Co-Founder of Theosophical Society)  one learns that Swami Vivekananda, Virchand Gandhi and H.Dharmapala captivated public in 1893′s parliament of world religions . Virchand Gandhi was known for his practice of universal brotherhood. And was admired by western people  .  He was scholar in various world religions .  Virchand Gandhi delivered 535 lectures in USA and Europe on various subjects like philosophy , occult science , concentration and others . And he happens to be one of the early personalities who introduced yoga to western people through his speeches on yoga . He  died only at age of 37.  He was friend of Mahatma Gandhi and Virchand Gandhi used to help M.K. Gandhi  in understanding  Indian law study by telling  him stories of stalwarts and barristers like pheroz shah and Badruddin Tyabji   (Reference: Mahatma Gandhi’s Autobiography , In Story of  My Experiments with Truth). He is credited for scholarly translation of then a rare book,  from french to English – ‘Unknown Life of jesus Christ’.  Virchand Gandhi used to always express  gratitude towards western people on his and nation’s behalf , in his speeches for their extended love and respect . 25th August, 2014 is his 150th Birth Anniversary .  (More about VRG  Revival could be read at end of this webpage.)

'Virchand Gandhi Spiritual Peace Quote'

Virchand Gandhis Famous Quote on Spirituality

Note : For  English news article written by Pankaz Chandmal Hingarh on Virchand Raghavji Gandhi and covered by Esteemed Newspaper Publication ‘The South Asian Times’ & ‘India Tribune’ in 2012  could be read online below.

1. http://thesouthasiantimes.info/index.php?param=news/4883//112  Sept. 2012

2. http://thesouthasiantimes.info/index.php?param=news/4813//112  Sept. 2012

3. http://www.indiatribune.com/index.php?option=com_content&view=article&id=9374:virchand-gandhi–a-gandhi-before-gandhi-an-unsung-gandhi-who-set-course-for-his-namesake-&catid=25:community&Itemid=457   August .2012

virchand gandhi

For Gujarati Version Please read attached 2 articles published in Rakhewal Newspaper and Pen Men Newspaper

1. Rakhewal_Virchand Gandhi article

2. Penmenpart1_Dharamveer_Krantiveer_virchand gandhi

3. Penmenpart2_virchand gandhi_article

 
राष्ट्र भक्त – बर्रिस्टर वीरचंद राघवजी गाँधी (1864-1901) की अनकही कहानी
लेखक – पंकज हिंगड़  &  चंद्रेश धीरज गाँधी ( परपौत्र वीरचंद गाँधी , महुवा , सूरत , 917567468916)
 
बहुत कम लोग जानते होंगे की महात्मा गाँधी जी के समकालीन में एक और विख्यात गाँधी हुए थे जो महात्मा गाँधी जी के मित्र थे , जिनका नाम था वीरचंद राघवजी गाँधी  जिनकी स्मृति में भारत सरकार ने डाक टिकेट जारी किया है  .
 
वीरचंद जी का जनम 25th अगस्त 1864 को गुजरात के महुवा गाँव में हुआ .  उनके  पिता जी श्री राघवजी तेजपालजी गाँधी , महुवा नगर के प्रतिष्ठित नगरशेठ थे व उनका मोती – जेवरात का व्यापर था. एक दिन उनके सपने में शाशन देवी पद्मावती देवी आई , व उनसे  कहा की हे पुत्र तेरे यहाँ होने वाला सुपुत्र शाशन प्रभावक होगा जो पुरे विश्व में जैन शाशन का डंका बजाएगा व फल स्वरुप तेरे घर के आंगन को खुदवाने पर प्राचीन श्री पार्श्व नाथ  भगवन की तेजस्वी प्रतिमा मिलेगी . देवी का कथन सत्य हुआ , घर के आंगन को खुदवाने पर प्रभु पार्श्व नाथ की प्रतिमा प्राप्त हुई व उनके यहाँ एक सुपुत्र का जनम हुआ , चूँकि उनका घर जीवित महावीर स्वामी तीर्थ के पास था व वर्त्तमान में वीर प्रभु का शाशन भी है , उन्होंने अपने पुत्र का नाम वीर चंद रखा . १८७९ में वीरचंद जी का जीवी बेन से विवाह हुआ .वीरचंदजी ने २१ वर्षा की आयु में अपना बी ऐ (औनोर्स) ,बॉम्बे के एल्फिन्स्त्न  कॉलेज से किया व तब तक वे १४ भाषा के ज्ञाता व सर्व धर्म ग्रंथो के विद्वान् बन चुके थे . २१ वर्ष की आयुष्य में वे भारत के जैन संघ के सचिव नियुक्त किये गए . वीरचंद जी ने पलिताना दर्शन के लिए वहां के ठाकुर (राजा ) को प्रति व्यक्ति को जो कर देना पड़ता था उसे अपनी जान पर खेलकर व अंग्रेजो से मिलकर प्रति व्यक्ति कर को रद्द कराया . इसी तरह कोलकत्ता जाकर बंगाली सिख कर उन्होंने कोर्ट में अपने द्वारा दस्तावेज देकर सम्मेत शिखरजी के प्रांगन में एक अंग्रेज बिज़नस मेन  बेद्दम का बना हुआ सूअर के कतल खाने को बंद कराया .महात्मा गाँधी जी  ने अपनी आत्मा कथा ‘स्टोरी ऑफ़ माय एक्सपेरिमेंट्स विथ तृत’ (पार्ट २, चैप्टर III ) में यह व्यक्त किया है की भारतीय कानून का अध्यन उनके लिए कठिन था खासकर ‘सिविल परोसीजर कोड १’ व  उनके भाई स्वरुप मित्र वीरचंद गाँधी उन्हें फ़िरोज़ शाह व  बदरुद्दीन  त्याब्जी जैसे दिग्गज वकीलों के किस्से व कहानिया सुनाके , महात्मा गाँधीजी को भारतीय कानून का अध्यन समजाने की हर मुंकिन कोशिश किया करते .
 
 
Virchand Raghavji Gandhi

Virchand Gandhi at a glance

 
 
इसी बीच १८९३ में विश्व का सर्व प्रथम विश्व धर्म परिषद् चिकागो , अमेरिका में होने जा रहा था . इसमें सिर्फ विश्व के दिग्गज जो को ही आमंत्रण था . भारत से जैन धर्म के लिए नव युग निर्माता , पंजाब देशउधारक परम पूज्य आचार्य श्री विजय आनंद सूरीजी उर्फ़ मुनि आत्मा रामजी को आमंत्रण था . चूँकि जैन साधू की कुछ मर्यादा होती है वे सात समुन्दर पार नहीं जा सकते थे , पर ऐसा प्रसंग को चुंकना भी नहीं था , क्योंकि तब विश्व में ज्यादातर लोग जैन धर्म से अज्ञान थे . मुनि आत्मारामजी के शिष्य विजय वल्ल्भ्सुरीजी ने सुजाव किया की हमे एक जैन विद्वान श्रावक को अपना प्रतिनिधि बनाके जरूर भेजना चाहिए .सर्व संघ के समहति से मुनि आत्मारामजी ने वीरचंद गाँधी को ६ महीने का प्रशिक्षण देकर पर्लिअमेंट के और रवाना किया . वीरचंद गाँधी अपने साथ एक बावरची – रसोया को ले गए  क्योंकि विदेश में शाकाहार भोजन मिलना मुश्किल था . पगड़ी बांधे जोधपुरी स्टाइल का सुट पहने वीरचंद गाँधी जब अमेरिका पहुंचे तब वे मात्र २९ वर्ष के थे .चिकागो में पर्लिअमेंट में अपनी स्पीच की सुरुवात के पहले उन्होंने गुरदेव मुनि आत्मारामजी की तरफ से  व समस्त जैन समाज की तरफ से पर्लिअमेंट के आयोजको को  बधाई दी , व वीरचंद जी  ने कहा की मुनि आत्मारामजी किसी कारण वर्ष नहीं आसकते थे इसलिए  मुझे सिर्फ मुनि आत्मारामजी का मौथ पिस समजिये . मतलब बोल मेरे होंगे पर वाणी गुरुदेव की होगी .
"Virchand Gandhi" "Indian Patriots" "Indian Philosohers""heroes of India"

Three Heroes who captivated public in 1893s parliament of world religions at Chicago, sitting on Parliament Stage

चिकागो में उन्होंने जैन धर्म का एकदम प्रभावित प्रदर्शन किया लेकिन जब विश्व धर्म परिषद् में हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति पर कुछ असामाजिक तत्वों ने तीखा प्रहार किया तो वह वीरचन्द जी से सहन नहीं हुआ उसपर  उन्होंने सिंह गर्जना की व अपने वक्तव्य के द्वारा अपनी राष्ट्र भक्ति को दर्शित किया व हिन्दू धर्म का बचाव किया. वीरचंद गाँधी ने अकबर बादशाह की भी जिंदगी में से एक कहानी सुनाई व दर्शाया की अकबर बादशाह सर्व धर्मो का आदर करते थे.
'Virchand Gandhi quote'

Virchand Gandhi a true indian visionary

वीरचंद गाँधी के पहले विदेशी लोग जैन धरम को बौध धरम की शाखा समझते थे . लोग जैन धरम व जैन धरम के सिद्धांतो की और आकर्षित हुए व वीरचंद गाँधी को कुछ साल अमेरिका में रहने की विनंती की.  विश्व धरम परिषद् के पश्चात , वीरचंद जी गाँधी का भू सम्पत्ति के ऊपर स्पीच भी  विश्व  भू सम्पत्ति परिषद्  में सहराया गया यह हमे न्यू योर्क टाइम्स की न्यूज़ से पता चलता है .

वीरचंद गाँधी ने अमेरिका व यूरोपे में कुल ५३५ स्पीचेस दिए व कई मेडल जीते . १८९४ में  वीरचंद गाँधी ने ‘ अन नॉन लाइफ ऑफ़ जीजस क्रयइस्ट’ का फ्रेंच से इंग्लिश में अनुवाद किया. वीरचंद गाँधी जब बर्रिस्टर की पढाई करने ब्रिटेन गए , तब वे अपनी धरमपतनी को भी ले गए . वीरचंद गाँधी के सुपुत्र मोहनदास ने भी विदेश में अपने पिता के साथ छोटे मोटे इंग्लिश में स्पीचेस दिए .

Virchand Gandhi Quotes on vegetarianism

वीरचंद  गाँधी और  स्वामी  विवेकन्दा अच्छे  मित्र थे , १८९४ को स्वामीजी ने  अमेरिका (पता – ५४१ , देअर्बोर्ण  अवेन्यू  , चिकागो) से  श्री  हरिदासजी  देसाई (  जूनागढ़  दीवान ) को पत्र लिखा की – अब  यहाँ  वीरचंद  गाँधी है , एक जैन जिसे आप  बॉम्बे  से जानते  हैं . वे  इस  भयंकर  ठंडी  में भी  शाकाहारी  भाजी तरकारी के सिवाए कुछ नहीं खाते हैं व इनके नख व दांत हमेशा अपने देश व धर्म की सुरक्षा के लिए प्रयत्न शील रहते है . अमेरिका की जनता वीरचंद जी को खूब पसंद करती है

Virchand Raghavji Gandhi

१८९९ में अन्तराष्ट्रीय कांफेरेंस ऑफ़ कोमरस में भारत से जाने वाले वे एक लौते प्रतिनिधि थे .वीरचंद जी के द्वारा स्थापित सोसाइटी फॉर द ऐडुकेशन ऑफ़ वूमेन इन इंडिया से कई भारतीय महिलाओ ने अमेरिका जाकर उच्च शिक्षा हासिल की . उनके बारे में कई लेख अमेरिका की प्रतिष्ठित अखबारों में प्रदशित हुआ जैसे न्यू योर्क टाइम्स व अन्य . मात्र ३७ वर्ष की आयुष्य में उनका स्वर्गवास हो गया (7th August, 1901).

'Virchand Gandhi'

Dhiraj Mohandas Gandhi , grand son of Virchand Gandhi with Prime Minister Smt. Indiraben Gandhi and Vadilal Chitrabhuj Gandhi

मोहनदास वीरचंद गाँधी को दो सुपुत्र हुए , धीरज भाई व रसिक भाई . जब धीरज भाई बॉम्बे हिन्दू महा सभा के अध्यक्ष थे तब उन्हें मिलने इंदिरा बेन गाँधी व वाडीलाल चित्रभुज गाँधी आए थे . रसिक भाई का परिवार भावनगर शिफ्ट हो गया व अब भी धीरज भाई का परिवार वीरचंद गाँधी के  महुवा के  उसी एतिहासिक घर में रहते है .  अपने मित्र वीरचंद गाँधी की मृत्यु  उपरांत भी उनके पुत्र मोहनलाल गाँधी से व पौत्र धीरज भाई से सुभेछा पत्र  का व्यवहार महात्मा गांधीजी ने रखा . हमे गर्व है की हम ऐसे शासन सेवक के वंसज है व प्रभु हमे भी बर्रिस्टर श्री वीरचंद जी  राघवजी गाँधी दादा श्री की तरह शासन सेवा का सु अवसर दे . सच कहते है कुछ लोग  इतिहास पड़ते हे , कुछ लोग  इतिहास लिखते है , पर वीरचंद जी दादा श्री जैसे लोग  इतिहास रचते है .

वीरचंद गाँधी परिवार शाखा :

राघवजी   तेजपालजी   गाँधी (Mahuva, Gujarat)

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वीरचंद राघवजी गाँधी        पर्वतिबेन राघवजी गाँधी (बचपन में ही स्वर्गवास)

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मोहनलाल वीरचंद गाँधी

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धीरज मोहन गाँधी        रसिक मोहन गाँधी

(महुवा)                              (भावनगर)

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1.कुंदन बेन                 1.नयना बेन

2.दिलीप भाई            2.नविन भाई

3.कीर्ति भाई               3. किरण बेन

4.चंद्रेश भाई                4. शरद   भाई

5. हर्षा बेन

6. रूपा बेन

Contact : चंद्रेश धीरज गाँधी – ( परपौत्र वीरचंद गाँधी ) महुवा , सूरत – 917567468916

This is official blog of Virchand Gandhi descendants.

விர்சன்ட் கன்தி , ವಿರ್ಚಂದ್ ಗಾಂಧಿ , વીરચંદ ગાંધી , విర్చాండ్ గాంధీ , विर्चन्द् गन्धि, विर्चंद गांधी

"Pranayam""spirituality""virchand gandhi"

In USA and Europe , Virchand Gandhi also lectured on various other topics like pranayam, occult science, yoga , concentration, Trade and Commerce, etc.

Our another blog : http://virchandgandhi.wordpress.com/

More About Revival of Virchand Gandhi :

From 1901 till date nonstop Shree Atma Vallabh Sangh has attempted to keep memories of Shree Virchand raghavji gandhi revived. And in 1910 Shree Bhagubhai Karbhari played instrumental role.

In 1964 P.P.Gurudev MuniShree Chitrabhanuji , Shree Vallabh Trust, Shree Dhiraj Gandhi -Shree Rasik Gandhi (Grand son’s of VRG) , Shree Panalalbhai Shah, Shree Korabhai, Shree Mahendra Kumar Mast & others tried to revive VRG  . Historically, in 1993 Institute of Jainology (UK) created awareness about VRG in 1993′s Parliament of religions and installed bust at Chicago because of Padamshree Kumarpalbhai Desai, Shree Nemubhai Chandaria, Shree Ratilalbhai Chandaria & Shree Tansukhbhai Salgia. A bust at Mahuva is also installed and Chowk was named after VRG because of Padamshree Kumarpalji Desai and Mahuva Jain Sangh. This highly inspired Shree Pravinbhai. C .Shah and he carried torch ahead as JAINA’s founder VRG chair from 1997 to 2010 and today major revival is credited to Shree Pravinbhai  C Shah. JAINA initiated and WJC  succeeded in getting approval of VRG postal Stamp by Indian Govt. due to concrete efforts of Shree Mahesh Gandhi whereby Shree Pradip Jain (Patna), Shree Pratap Bhogilal (Batliboi), Prakash Mody (Canada), Pravin C Shah (USA) , Doulat Bhai Jain (Chennai) , Smt. Rakshaben shah , Shree GunwantBhai Barvalia & others were of great help in VRG mission . Scholar Padamshree Kumarpal Desai ,  Scholar Shree Panalalbhai Shah ,  Shree Pankaz Chandmal Hingarh are  senior most authority on Virchand Gandhi  . Dr. Bipin Doshi & Smt. Preetiben shah  have written classic coffee table book ‘Gandhi Before Gandhi’  and a drama is based on this book. Rangat Production’s ‘Gandhi before Gandhi’ drama based on life of Virchand Gandhi ,has completed 200+shows worldwide . Shree  Dhirajbhai  Gandhi and Shree Rasikbhai Gandhi’s contribution cannot be forgotten who gave all materials & medals of VRG to Shree Mahavir Jain Vidyalaya for creating awareness about VRG and future VRG museum VRG’s  and VRG’s family members are eager for  such projects.  Currently Chandresh Gandhi and VRG family members have started lecturing on VRG. Currently a chowk on VRG is named at Ahmedabad due to Institute of Jainology (UK), Padamshree Dr. Kumarpalji Desai ,Shree Nemubhai Chandaria and generous support of Ahmedabad’s Hon’ble Mayor Shree Asitbhai Vora and well wish of MLA, Shree Rakeshbhai Shah. And wish to continue same and create awareness about VRG who will prove inspiration for upcoming  young  generation….In recent past P.P.Acharya Lokeshji Muni and prof. Ratanji Jain had contacted govt. officials for 150th Birth Anniversary. Shree Atma Vallabh Sansthan has decided to celebrate 150th Birth Anniversary of Virchand Raghavji Gandhi under guidance of P.P. Acharya Vijay Nityanandsuriji M.s. whereby  P.P. Acharya Vijay Jayanand Suriji , P.P. Acharya Vijay Nityanandsuriji M.s , P.P. Munishree Jaykirtiji and Complete Atma Vallabh Jain Sangh played major role in felicitating Virchand Raghavji Gandhi family and creating awareness about Virchand Raghavji Gandhi from last 1901 till date.

Virchand Gandhi Chowk inauguration

Honble Mayor Shree Asitbhai Vora, MLA Shree RakeshBhai Shah, Padamshree Dr. Kumarpalji Desai, Shree MaheshBhai Gandhi, Shree Chandresh Gandhi, Shree ArvindBhai Doshi, Smt. Preetiben Shah at inauguration of Virchand Gandhi Chowk at Ahmedabad , Gujarat (India) on 18th September,2012

Naming of  a Public Sqaure of Virchand Gandhi

Left to Right : Shree Arvind Doshi (Premier Automobiles Ltd.),Shree Shreyas Shah(Gujarat Samachar), Shree Asita Vora (Ahmedabads Honble Mayor), Shree Rakeshbhai Shah (MLA), Padamshree Dr. Kumapalji Desai (Scholar) , Shree Chandresh gandhi (VRGs Great Grand Son), Shree Maheshji Gandhi (Person who tirelessly worked hard to get VRG stamp-release approved from Govt. with his other associates)